चंबा (हिमाचल प्रदेश) :- हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा के भजोतरा के एक छोटे से गांव मटवाड में हाल ही के दिन में एक बड़ी समस्या सामने आई है जो न केवल गांव के लिए बल्कि राज्यों के स्तर पर भी चिंता का विषय बन गई है अधूरे बचपन के बीच संघर्षिता जिला चंबा के मटवाड ग्राम के नाबालिक बच्चों की कहानी ने द्वारा खटखटाते हुए शिमला तक पहुंच बना ली है यह कहानी उन बच्चों की है जिन्होंने समय के बेरुखी से सामना किया है अजय, जो भजोतरा पंचायत से है उन्होंने जब इन बच्चों की हालत देखी तो कर बन्याल एपीआरो के सहयोग से, जो स्वयं बेसहारा नाबालिक बच्चों की मदद के लिए तत्पर थे इस जर्जर स्थिति को संभालने की कोशिश की बहुत सारे दोनों के संघर्ष और प्रयासों के बाद अंतत यह कहानी मुख्यमंत्री तक पहुंच गई।
अधूरे बचपन के बीच जूझते मटवाड गांव के बच्चों तक मुख्यमंत्री सुक्खु, दिया सहारा और आश्वासन
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु स्वयं खाद्य सामग्री लेकर मटवाड पहुंचे और बच्चों को आवश्यक राशन देने का आश्वासन दिलाया और उनके द्वारा दिए गया एवं मानवीय पहल बच्चों के लिए कहीं ना कहीं राहत लेकर आया है शनिवार को उन्होंने बच्चों से वीडियो कॉल पर बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुनने और समझने का प्रयास किया और वीडियो कॉल पर नए बच्चों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती थी लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया आश्वासन ने कहीं ना कहीं उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान लौटा दी है।
बच्चों की बढ़ती परेशानियों के बीच मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि सरकार कभी भी उनकी मुश्किलों को अनदेखी नहीं करेगी और उन्होंने यह विश्वास दिलाते हुए कहा है कि बच्चों की पढ़ाई अब कभी रुकने नहीं दी जाएगी और उनके जीवन को सुधारने की जिम्मेदारी राज्य सरकार खुले दिल से उठाएगी संवेदनशील स्थिति का ध्यान रखते हुए भविष्य की संभावनाओं पर नजर रखी जाएगी प्रशासन ने उनकी शिक्षा और रहन-सहन को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया था कि कोई भी देरी न हो सके।
पिता की मौत और मां की छूने के बाद संघर्ष कर रही नावालिंग के बच्चों को सरकार ने दिया पक्का मकान, शिक्षा और योजनाओं का भरोसा
दरअसल, मटवाड गाँव के यह बच्चे पहले पिछले कई सालों से जीवन के गंभीर हालत से संघर्ष संघर्ष कर रहे हैं 2021 में उनके पिता का निधन हो गया था जिसके बाद सब कुछ बदल गया उनकी मां दूसरी शादी कर ली और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया यह बच्चे बड़ी बहन निशा के 11वीं कक्षा की पढ़ाई और उसके छोटे 15 वर्ष या भाई के 12वीं कक्षा की पढ़ाई के बीच जीवन यापन कर रहे हैं उनकी खुद की कमाई से भी जरूर बांधों को सहारा मिल रहा है।यह भी पढ़े :- बंजार की तीर्थन घाटी में फिर अग्निकांड, समय रहते नियंत्रित, कोई जनहानि नहीं
मुख्यमंत्री ने यह वादा किया है कि इन बच्चों को सरकार की सभी जरूरी योजनाओं का लाभ ही गरीब मिलेगा विकासखंड सलूणी के अधिकारी बच्चों के लिए पक्का मकान बनाने की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं सोशल मीडिया पर उनकी कहानी वायरल होने के बाद समुदाय क्या ध्यान की समस्याओं की तरफ गया और संविधान की स्थिति में मदद का हाथ आगे बढ़ाया बहुत जल्दी इन बच्चों को एक सुरक्षित और सुदृढ़ आश्रय मिलेगा।
.png)
