शिमला (हिमाचल प्रदेश)
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आईजीएमसी विवाद ने एक नया और अनपेक्षित मोड़ ले लिया है जिसे जनता और प्रशासन को चौका दिया है अस्पताल में मारपीट के शिकार हुए मरीज अर्जुन पवार की पहचान को लेकर एक सनसनी खुलासा हुआ है जिससे मामला और उलझ गया है सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से यह दाबा फैल रहा है कि अर्जुन शिक्षक नहीं है जैसा कि पहले माना जा रहा था वास्तविकता में वह कैंटीन चलाते हैं और शिक्षा के क्षेत्र में प्रत्यक्ष रूप से जुड़े नहीं है इसके अतिरिक्त यह भी सामने आया है कि उनके खिलाफ लगभग 6 महीने पहले मारपीट का एक कैस कुपवी में दर्ज किया जा चुका है यह कैस जमीनी विवाद और घर निर्माण से संबंधित था जिसमें आरोप लगाया गया है कि अर्जुन और अन्य ने मशोट गांव के सुरेश कुमार के साथ हाथापाई की थी पुलिस ने यह मामले को गंभीर मानते हुए बीएनएस की विभिन्न धाराओं की तहत मारपीट और जान से मारने की धमकी देने की शिकायत दर्ज की थी।
पहले भी दर्ज है मारपीट का मामला, डॉक्टर हड़ताल पर, मुख्यमंत्री ने दिए पुनः जांच के आदेश
टीचर नहीं कैफ़े मालिक है अर्जुन, शिमला में स्थित एस्पायर अकैडमी के एमडी योगेश कुमार मीणा ने अर्जुन की पहचान को लेकर चल रही अफवाहों पर सचाई प्रकट की है उन्होंने साफ किया है कि अर्जुन उनके संस्थान में पढ़ाते नहीं है बल्कि वह सिर्फ एक कैफे का संचालन करते हैं हालांकि एमडी मीणा यह अभी बताते हैं कि बीते 4 सालों में अर्जुन के खिलाफ किसी तरह की बदसलूकी की कोई शिकायत नहीं आई है अर्जुन ने कभी किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं किया है और इसलिए यह मामला अधिक ध्यान आकर्षित कर रहा है अकादमी प्रबंधन ने इस विवाद के संबंध में अधिक विवरण देने से परहेज किया है और चुप्पी साध ली है।
डॉक्टर हड़ताल पर, सीएम ने दिए जांच के दिए आदेश
इस विवाद के कारण प्रदेश भर में चिकित्सा जगत में भी कल वाली मच गई है नतीजा शुक्रवार को राज्यों के विभिन्न हिस्सों में 2800 से अधिक डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्रभावित किया है और डॉक्टर के एक प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री से बैठकर जांच की मांग की स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मामले की निष्पक्षता से पुन: जांच के आदेश दिए हैं और दूसरी ओर पीड़ित मरीज अर्जुन पवार ने अब तक कोई पुलिस कार्यवाही पर अपनी कोई असंतोष जाहिर किया है जिससे शिमला आईजीएमसी का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है अब पुलिस की आगामी जांच रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है ताकि इस विवाद की सचाई सामने आ सके और सभी सवालों के जवाब मिल सके।यह भी पढ़े :- IGMC शिमला मारपीट मामला मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बयान
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