शिमला/हिमाचल प्रदेश
प्रशासनिक कार्य कार्य प्रणाली को तेज करने की पहल
अब तक, प्रदेश में एक लाख रुपये से अधिक लागत वाले विकास कार्यों के लिए फाइलें जिला या विभाग मुख्यालय तक भेजनी पड़ती थीं। इस प्रक्रिया में कई स्तरों पर स्वीकृति की आवश्यकता होती थी और निर्णय लेने में देरी होती थी। आम जनता को सुविधा का सामना करना पड़ता था। लेकिन सरकार के इस नए फैसले के बाद, एसडीएम स्तर पर ही पांच लाख रुपये तक के कार्यों की स्वीकृति संभव हो सकेगी, जिससे प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।
किन कार्यों को मिलेगी एसडीएम से मंजूरी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एसडीएम द्वारा जिन विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान की जाएगी, उनमें स्थानीय और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल होंगे। इनमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में सड़कों की मरम्मत, नालियों और जल निकासी व्यवस्था का निर्माण, पेयजल से जुड़े छोटे विकास कार्य, सरकारी भवनों की मरम्मत और रखरखाव, स्कूल, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्रों से संबंधित छोटे कार्य और सार्वजनिक सुविधाएं शामिल हैं।
स्थानीय जरूरतों के अनुसार तुरंत निर्णय
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार तुरंत निर्णय लिया जा सकेगा। एसडीएम क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और स्थानीय समस्याओं से परिचित होते हैं, इसलिए नए अधिकार मिलने से जनता की समस्या का समाधान तेजी से पूरा किया जा सकेगा। विशेष रूप से आपदा प्रभावित क्षेत्रों और बरसात या बर्फबारी के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों और जल आपूर्ति को बहाल करने में यह फैसला उपयोगी साबित हो सकता है।
पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन पर रहेगा जोर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एसडीएम द्वारा स्वीकृत सभी कार्यों को निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार पूरे किए जाएंगे। सभी कार्यों की तकनीकी स्वीकृति आवश्यक होगी, बजट प्रावधानों का पालन अनिवार्य रहेगा, गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी और कार्यों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा। इससे भ्रष्टाचार की आशंका को कम किया जा सकेगा और विकास कार्य में पारदर्शिता बनी रहेगी।
बर्षो से अटके छोटे कामों को मिलेगी रफ्तार
प्रदेश में कई छोटे क्षेत्रों में छोटे-छोटे विकास कार्य केवल स्वीकृति की प्रक्रिया में देरी के कारण वर्षों तक अटके रहते थे। लेकिन इस नए व्यवस्था के लागू होने से छोटे विकास कार्य समय पर पूरे होंगे और जनता को बार-बार कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। विभाग के दबाव कम होगा, प्रशासनिक मशीनरी अधिक प्रभावी बनेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में यह फैसला विशेष रूप से लाभकारी माना जा सकता है।
प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की दिशा में अहम - कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। जब निर्णय लेने की शक्ति निचले स्तर तक पहुंचती है, तो प्रशासनिक अधिक उत्तरदाई और प्रभावी बनता है। इससे न केवल एसडीएम की भूमिका मजबूत होगी, बल्कि प्रशासन और आम जनता के बीच भी अधिक विश्वास बढ़ेगा।
सरकार के इस फैसले का विभिन्न जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह फैसला जनहित में लिया गया है और एक दूरदर्शी निर्णय है, जिससे विकास कार्य में अधिक तेजी आएगी और जनता को समय पर सुविधाएं मिल सकेगी।
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा एसडीएम को पांच लाख रुपये तक के विकास कार्यों की स्वीकृति देने का अधिकार देना प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी गई है। इससे न केवल विकास कार्य में गति तेज होगी, बल्कि स्थानीय समस्याओं का समाधान भी समय पर किया जा सकेगा। यह फैसला प्रदेश में सुशासन को प्रदर्शित करेगा और जनसेवा की ओर अधिक मजबूत करेगा।
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