हमीरपुर/हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसमें न केवल इंसानियत को शर्मसार किया गया है बल्कि समाज और परिवार जैसे रिश्ते पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए गए हैं अपने ही घर में 10 वर्ष गूंगी पोती को कई वर्षों तक हवस का शिकार बनाने वाले 71 वर्ष दादा को विशेष पोक्सो अदालत हमीरपुर ने कड़ी सजा सुनाई गयी है अदालत ने आरोपी को मुख्य अपराध के लिए 25 वर्ष की कठोर कारावास और ₹50000 रुपये जुर्माने की भी सजा सुनाई गई है इसके साथ ही यौन उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी से जुड़े अन्य अपराधों में भी अतिरिक्त सजा दी गई है जो उनकी सजा भी साथ-साथ चलेगी।
पोक्सो कोर्ट का सख्त फैसला
विशेष पोक्सो अदालत ने अपने फैसले में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यह अपराध 'रेयरेस्ट ऑफ़ द ईयर श्रेणी' में आता है क्योंकि आरोपी न केवल एक नाबालिग बच्ची के साथ अपराध किया है बल्कि उसकी दिव्यागता (मूक- बधिर होना) का भी फायदा उठाया अदालत ने कहा है कि ऐसे अपराध समाज की आत्मा को झंझोर कर रख देते हैं और रिश्ते की आड़ में मासूम बच्चों का भी शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
पीड़िता जन्म से ही गूंगी
पीड़िता जन्म से ही बोल और सुन नहीं सकती थी और इसी कमजोरी का फायदा आरोपी दादा ने अपना हथियार बना लिया था बह बच्ची को इशारों में धमकता था और उसे जान से मारने की भी धमकी देता था और उसे चुप रहने पर मजबूर भी करता रहता था इस खौफनाक शोषण का सिलसिला साल 2017 से लगभग लगातार चलता रहा और बच्ची सालों तक इस दर्द को अपने भीतर दवाए रही।
स्कूल की सतर्कता से खुला मामला
यह मामला दिसंबर 2022 में उसमें सामने आया जब पीड़िता ने पांचवी कक्षा में पढ़ रही थी और स्कूल में एक शिक्षक ने बच्ची के व्यवहार और इशारों में बताई गई बातों से उसके दर्द को समझा शिक्षक ने तुरंत स्कूल प्रबंधन प्रधानाचार्य और संबंधित अधिकारियों को सूचित किया इसके बाद मामला पुलिस तक जा पहुंचा और कानूनी कार्यवाही भी शुरू कर दी गई।
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी और आरोपी को भी गिरफ्तार कर उसे अदालत में पेश कर दिया गया था सुनवाई के दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज भी कर दिए गए और मेडिकल तथा अन्य तकनीकी सबूत पेश किए गए पीड़िता की विशेष स्थिति को ध्यान में रखते हुए संवेदनशीलता के साथ बयान लिए गए अदालत ने सभी सबूत के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया।
किन धाराओं में सजा सुनाई गई
अदालत ने आरोपी को:
• पोक्सो एक्ट (गंभीर यौन अपराध) के तहत 25 वर्ष कठोर कारावास और 50000 जुर्माना
• पोक्सो एक्ट धारा 12 यौन उत्पीड़न के अन्य कृत्य एक वर्ष की अतिरिक्त सजा
• आईपीसी धारा 506 जान से मारने की धमकी 1 वर्ष का साधारण कारावास अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजा साथ-साथ ही चलेगी।
समाज को झंझोर देने बाला मामला
इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और महिला बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने संतोष व्यक्त किया लेकिन साथ ही चिंता भी जताई गई कि ऐसे अपराध घरों के भीतर हो रहे हैं और जहां बच्चों को सबसे ज्यादा सुरक्षित होना चाहिए था समाजशास्त्रियों का मानना है कि दिव्यांग बच्चों के साथ अपराधों में रिपोर्टिंग कम होती है क्योंकि वह अपनी बात कहने में असमर्थ होते हैं ऐसे मामले में शिक्षकों और स्कूलों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
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बढ़ते अपराध, बढ़ती चिंता
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हिमाचल प्रदेश में महिलाओं नाबालिग बच्चियों और विशेष बच्चों के खिलाफ अपराध के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं विशेषज्ञों का कहना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट संवेदनशील जांच और कठोर सजा ही ऐसे अपराध पर लगाम लगा सकते हैं।
फैसला बना नजीर
पॉक्सो कोर्ट का यह फैसला अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है समाज के लिए एक चेतावनी देता है और यह साबित करता है कि कानून मासूमो के साथ खड़ा है यह फैसला उन दरिंदों के लिए भी चेतावनी है जो रिश्तो की आड़ में बच्चों का बचपन छीन लेते हैं।
यह मामला हमीरपुर जिले का बेहद ही हृदय विदारक है लेकिन अदालत का सख्त फैसला यह भरोसा भी दिलाता है कि न्याय व्यवस्था पीड़ितों के लिए साथ डटकर खड़ी है जरूरत है कि समाज परिवार और संस्थाएं मिलकर बच्चों खास तौर पर दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
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