शिमला/हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर अनिश्चित और गहरी हो गई है। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले मे सभी पक्षों की दलीलों सुनने के बाद अपना फ़ैंसला सुरक्षित रख लिया है। अब राज्य की जनता, राजनीतिक दलों और प्रशासन की नजरे अदालत के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।
सरकार और याचिकाकर्ताओ के बीच तीखी बहस
हाईकोर्ट मे लगातार दूसरे दिन इस मामले को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ट अधिव्क्ता श्रवण डोगरा ने पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ताओ ने सविधान का हवाला देते हुए समय पर पंचायत चुनाव कराने की माँग की।
याचिकाकर्ताओ का तर्क है कि पंचयतो का पांच वर्षीय कार्यकाल पुरा होने से पहले ही चुनाव कराना सवेधानिक बाध्यता है। वही, सरकार ने चुनाव प्रक्रिया को कुछ समय के लिए टालने की जरूरत बताई थी। पिछली सुनवाई मे सरकार ने छह महीने तक चुनाव न कराने का पक्ष रखा था, जिस पर मंगलवार की भी गहन चर्चा हुई थी।
किस बेंच ने की सुनवाई?
इस अहम मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रोमेश वर्मा की डिविजन बेंच ने की। इससे पहले यह केस मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया के समक्ष था, जिन्हीनें इसे डिविजन बेंच-1 को सोंपा था।
दोनों पक्षों ने अपने अपने जवाब अदालत मे दाखिल कर दिए है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फ़ैंसला जल्द सुनाया जा सकता है।
जानबुझकर देरी का आरोप
याचिकाकर्ताओ ने राज्य सरकार पर पंचायत चुनावों मे जांबुझकर देरी करने का आरोप लगाया है। सुनवाई के दौरान देवेंद्र नेगी बनाम स्टेट मामले का भी हवाला दिया गया।
याचिका मे कहा गया है कि सविधान के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराना अनिवार्य है साथ ही कोर्ट से मांग की गयी है कि राज्य चुनाव आयोग को तुरंत पंचायत चुनाव का शेड्यूल् जारी करने के निर्देश दिए जाए।
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फ़ैंसला कभी भी आ सकता है
हाईकोर्ट द्वारा फ़ैंसला सुरक्षित रखे जाने के बाद अब यह मामला निर्णायक मोड़ पर गया है। अदालत का निर्णय न केवल पंचायत चुनावों की तारीख तय करेगा, बल्कि राज्य की लोकतंत्रिक् प्रक्रिया पर भी असर डालेगा।
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