Tata Salt की पूरी कहानी : टाटा समूह भारत का एक नामी औद्योगिक घराना है जिसका इतिहास 125 साल से पुराना है और सवा सौ साल की इस यात्रा में भी टाटा ग्रुप ने भी ट्रक से लेकर स्टील तक की बड़े-बड़े बिजनेस में भी अपनी पहचान बनाई है क्या आप जानते हैं कि स्टील और ट्रक जैसे सामानों के यह निर्माण के अलावा भी टाटा समूह ने भी नमक के बिजनेस में भी दस्तक क्यों दी है और टाटा नमक का नाम हर देशवासी की जुबां पर है लेकिन, इस नमक की यह कहानी बहुत कम लोग ही जानते हैं कि खास बात यह है कि दिवंगत रतन टाटा को ही यह नमक बेचने का ही आइडिया आया था लेकिन इसे बिजनेस नहीं बल्कि यह लोगों की भलाई के लिए ही शुरू किया गया था।
सिर्फ बिजनेस नही, समाज सेवा का उदेश्य: कैसे शुरू हुआ टाटा साल्ट का सफर
देश जानता है कि रतन टाटा की यह लीडरशिप में भी टाटा समूह ने दुनियाभर में ही पहचान बनाई और इसी कड़ी में ही उन्होंने चाय से लेकर हर देशवासी के घर में टाटा नमक पहुंचाया और इसमें खास बात है कि इस रिटेल बिजनेस में भी रतन टाटा ने जनता की इस भलाई को भी प्राथमिकता दी गई और यह सुनिश्चित करते हुए कहा कि उनके उत्पादों में भी उनके स्वास्थ्य और स्वाद का भी ध्यान रखा जाए।
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टाटा नमक की विशेषता: रक्तचाप और आयरन की कमी को नियत्रित करने मे सहायक
दरअसल, देश में आयोडीन की कमी की इस समस्या को ध्यान में रखते हुए ही रतन टाटा एक ऐसा सॉल्युशन लेकर आए, जिसमें की लोगों की सेहत और स्वाद दोनों का भी ख्याल रखा गया है और आज से 40 साल पहले ही भारत में अधिकतर लोग खुला नमक ही खरीदते थे और जो स्वच्छ या आयोडीनयुक्त नहीं होता था और इसी समस्या के समाधान के लिए ही 1983 में टाटा केमिकल्स ने भारत में पैकेट में पहला ब्रांडेड आयोडीन युक्त नमक लॉन्च किया है टाटा नमक देश का पहला एक आयोडीन युक्त पैकेज्ड नमक बना, जिससे लोगों को भी बेहतर स्वास्थ्य मिला, और समय के साथ-साथ ही यह नमक इतना लोकप्रिय हुआ है कि देश में नमक की पहचान ही टाटा नमक से हो गई है।
डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार ही, टाटा समूह ने 1927 में गुजरात के ओखा में ही नमक उत्पादन की शुरुआत की गई थी. लेकिन, कंपनी ने भी नमक की खुदरा बिक्री 1983 में पैकेट में ही आयोडीन युक्त नमक बेचने के साथ ही शुरू की और यह नमक आयोडीन और आयरन की कमी को भी दूर करने की अपनी क्षमता के साथ-साथ ही रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी अपनी संभावित भूमिका के लिए ही जाना जाता है.
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