हिमाचल प्रदेश मैं प्रशासनिक हलको और सोशल मीडिया पर इन दिनों ओशिन शर्मा का नाम काफी चर्चा में चल रहा है शिमला शहर में SDM के पद पर तैनात अधिकारी ओशिन शर्मा ने अपने इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब समेत सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स डीएक्टिवेट कर दिए गए हैं और यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब उन पर एक निजी 'जिम सप्लीमेंट' के प्रचार से जुड़ा विवाद सामने आया है और मामले ने तूल पकड़ लिया गया है और प्रशासनिक नियमों, आचरण संहिता और सरकारी पद की मर्यादा को लेकर बहस काफी तेज हो गई है।
कौन है ओशिन शर्मा?
Oshin Sharma HAS अधिकारी अपनी सक्रिय कार्यशाली और सोशल मीडिया पर मजबूत उपस्थिति के लिए जानी जा रही है और पिछले एक वर्ष में उनके फॉलोअर की संख्या करीब 9 लाख तक पहुंच गई थी और वे समय-समय पर प्रशासनिक अनुभव, प्रेरक संदेश और जमीनी कार्यो से जुड़ी झलकियां सांझा किया करती थी और इसी लोकप्रियता ने उन्हें युवाओं के बीच एक खास पहचान दिलवाई थी।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
विवाद की जड़ एक निजी 'जिम सप्लीमेंट' ब्रांड के प्रमोशन से जुड़ी हुई है और आरोप यह है कि अधिकारी ने सोशल मीडिया पर इस उत्पाद से संबंधित पोस्ट भी साँझा की गई थी जैसे ही यह सामग्री सार्वजनिक हुई तो सोशल मीडिया पर सवाल उठने लग गए कि क्या किसी सेवारत सरकारी अधिकारी को निजी ब्रांड उत्पादन का प्रचार करना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक यह मामला प्रशासनिक स्तर पर पहुंच गया और जांच की बात सामने आई और इसके बाद ओशिन शर्मा ने अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स डीएक्टिवेट कर दिए गए और इस कदम को लेकर समर्थक और आलोचक दोनों पक्ष सक्रिय है और समर्थको का कहना है कि उन्होंने केवल व्यक्तिगत अनुभव साझा किया था और जबकि आलोचकों का तर्क है कि सरकारी पद पर रहते हुए किसी भी प्रकार का व्यवसायिक प्रमोशन नियमों के विरुद्ध हो सकता है।
क्या कहते है नियम?
सरकारी सेवा आचरण नियमों के अनुसार, सेवारत अधिकारी किसी निजी व्यावसायिक गतिविधियां उत्पादन का प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष प्रचार नहीं कर सकते उससे ही तो हितों के टकराव की आशंका हो तो हालांकि हर मामले में परिस्थितियों काफी अलग होती है और अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलता है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का यह मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता वर्तनी होती है क्योंकि व्यक्तिगत और आधिकारिक सीमाएं अक्सर धुंधली हो जाती है।
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पहले भी रहा है विवादो से नाता?
यह पहली बार नहीं है जब ओशिन शर्मा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं बल्कि मंडी के संगोल में तहसीलदार रहते हुए पेंटिंग कार्यों को लेकर उन्हें नोटिस भी जारी होने की खबर सामने आई थी जबकि बाद में उनका तबादला भी हुआ हालांकि तबादलों और नोटिस जैसी प्रशासनिक कदम कई कारणों से होते हैं और इन्हें अंतिम दोष सिद्धि भी माना जाता है इस बार मामला सोशल मीडिया और 'ब्रैंड प्रमोशन' से जुड़ा हुआ है इसलिए सार्वजनिक बहस और भी तीखी हो गई है।
सोशल मीडिया अकाउंट डीएक्टिवेट करने का असर
ओशिन शर्मा के एकाउंट्स डीएक्टिवेट होने से प्रशासनिक हलकों में चर्चा काफी तेज हो गई है एक और इसे जांच के दौरान सयम बरतने का कदम माना जा रहा है और दूसरी ओर कुछ लोगों ने इसे डैमेज कंट्रोल के रूप में देख रहे हैं सोशल मीडिया पर सक्रिय अधिकारियों के लिए यह घटना एक मिसाल की तरह भी देखी जा रही है कि लोकप्रियता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जा सकता है।
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मामले की गहन जांच के आदेश दिए जाने की जानकारी सामने आ गई है शिमला के उपयुक्त डीसी स्तर पर रिपोर्ट तलब होने और उच्च स्तर तक जानकारी पहुंचाने की चर्चा हो रही है यदि जांच में आचरण नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियम अनुसार कार्यवाही हो सकती है हालांकि अभी तक आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हो पाया है ऐसे में अंतिम निर्णय से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित भी नहीं होगा।
ओशिन शर्मा से जुड़ा यह विवाद केवल एक अधिकारी या एक पोस्ट का मुद्दा भी नहीं है यह उसे व्यापक प्रश्न को सामने लाता है जो की डिजिटल दौर में सरकारी अधिकारियों की सीमाएं क्या होती है यह बताता है जांच के नतीजे आने तक धैर्य रखना भी जरूरी है फिलहाल उनके सोशल मीडिया अकाउंट डीएक्टिवेट है और प्रशासनिक जांच अभी जारी बताई जा रही है और अंतिम निर्णय आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मामला नियम उल्लंघन था या महज गलतफहमी।
प्रशासनिक जाँच: आगे क्या?
मामले की गहन जांच के आदेश दिए जाने की जानकारी सामने आ गई है शिमला के उपयुक्त डीसी स्तर पर रिपोर्ट तलब होने और उच्च स्तर तक जानकारी पहुंचाने की चर्चा हो रही है यदि जांच में आचरण नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियम अनुसार कार्यवाही हो सकती है हालांकि अभी तक आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हो पाया है ऐसे में अंतिम निर्णय से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित भी नहीं होगा।
ओशिन शर्मा से जुड़ा यह विवाद केवल एक अधिकारी या एक पोस्ट का मुद्दा भी नहीं है यह उसे व्यापक प्रश्न को सामने लाता है जो की डिजिटल दौर में सरकारी अधिकारियों की सीमाएं क्या होती है यह बताता है जांच के नतीजे आने तक धैर्य रखना भी जरूरी है फिलहाल उनके सोशल मीडिया अकाउंट डीएक्टिवेट है और प्रशासनिक जांच अभी जारी बताई जा रही है और अंतिम निर्णय आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मामला नियम उल्लंघन था या महज गलतफहमी।
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